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Patna Student Arrest: पटना छात्र प्रदर्शन मामले में कार्रवाई तेज, 24 FIR, 258 छात्र बेऊर जेल भेजे गए

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Alam Ki Khabar: पटना में छात्र प्रदर्शन के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हो गई है। 24 एफआईआर दर्ज होने के बाद 258 छात्रों को बेऊर जेल भेजा गया। पुलिस का कहना है कि गिरफ्तारी सीसीटीवी, वीडियो और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है।

पटना, 27 जुलाई। आलम की खबर: राजधानी पटना में 22 और 25 जुलाई को हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में दर्ज प्राथमिकियों के आधार पर रविवार देर रात बड़ी संख्या में छात्रों को न्यायिक प्रक्रिया के बाद बेऊर केंद्रीय कारागार भेजा गया। इस दौरान कई छात्रों और उनके परिजनों की भावुक तस्वीरें सामने आईं।

पुलिस के अनुसार छात्र आंदोलन से जुड़े मामलों में अब तक 24 एफआईआर दर्ज की गई हैं। इनमें 285 लोगों को नामजद किया गया है, जबकि लगभग छह हजार अज्ञात लोगों को भी अभियुक्त बनाया गया है। जांच एजेंसियां वीडियो फुटेज, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपितों की पहचान कर रही हैं।

रविवार देर शाम गिरफ्तार छात्रों को छज्जूबाग स्थित न्यायिक प्रक्रिया के लिए लाया गया, जहां सुनवाई पूरी होने के बाद उन्हें देर रात बेऊर जेल भेजा गया। जेल भेजे जाने के दौरान कई छात्र भावुक हो गए। कुछ छात्रों ने खुद को निर्दोष बताते हुए कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि उनके परिजनों ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई।

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए गए हैं। जांच अधिकारियों का कहना है कि प्रत्येक मामले में उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ाई जा रही है।

इधर कुछ परिजनों का दावा है कि उनके बच्चों का प्रदर्शन से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था। कुछ परिवारों ने आरोप लगाया कि उनके बेटे अन्य काम से शहर में थे, लेकिन उन्हें भी हिरासत में ले लिया गया। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

पुलिस मुख्यालय का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी केवल उपलब्ध डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।

गौरतलब है कि इससे पहले भी छात्र आंदोलन के बाद पुलिस ने कई संदिग्धों की तस्वीरें सार्वजनिक कर उनकी पहचान करने की अपील की थी। अब पूरे मामले की जांच लगातार जारी है।

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विशेष टिप्पणी

छात्र आंदोलनों से जुड़े मामलों में कानून व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है, वहीं निष्पक्ष जांच और निर्दोष लोगों के अधिकारों की रक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। इस मामले में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। इसलिए किसी भी पक्ष के दावों को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक जांच के परिणाम का इंतजार करना आवश्यक है।

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